प्रगति का साथी: पंजाब नेशनल बैंक
पंजाब नैशनल बैंक भारत का एक प्रमुख और पुराना बैंक है जिस की शुरुआत आज से 127 वर्ष पूर्व 14 अप्रैल 1895 अनारकली बाज़ार लाहौर से हुई और 1947 से इस का मुख्य कार्यालय देश की राजधानी दिल्ली में स्थानांतरित कर दिया गया। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक है। मुख्यतय इस बैंक का विस्तार पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और बंगाल और ओडिशा में है। शेष भारत के लगभग सभी जिलों में और प्रमुख कस्बों में इसकी शाखायें हैं। भारत में स्टेट बैंक के बाद यह सब से बड़ा बैंक है और दुनिया के सबसे बड़े बैंकों में इसका 248 वां स्थान है। पंजाब नैशनल बैंक का ब्रिटैन में एक बैंकिंग सहायक उपक्रम है, साथ ही हांगकांग और काबुल में शाखाएं हैं और अल्माटी शंघाई और दुबई में प्रतिनिधि कार्यालय है। भूटान और नेपाल में भी बैंक की हिस्सेदारी है।
आजकल तो यह बैंक बहुत विशाल हो गया है परन्तु जब इस की शुरुआत हुई तो हर शुरुआत की तरह एक शाखा से हुई परन्तु इस के संस्थापकों में स्वदेशी आंदोलन के कई नेता शामिल थे जैसे दयाल सिंह मजीठिया और लाला हरकिशन लाल, लाला लालचंद, काली प्रसन्ना रॉय, ई.सी. जेसवाला, प्रभु दयाल, बख्शी जैशी राम और लाला ढोलन दास। लाला लाजपत राय अपने प्रारंभिक वर्षों में बैंक के प्रबंधन से सक्रिय रूप से जुड़े थे। बैंक के संस्थापक मुख्यतय आर्य समाज से भी प्रभावित थे। दयाल सिंह मजिठिया पंजाब में ट्रिब्यून और DAV स्कूल और कॉलेजों के भी संस्थापक रहे। देश में बहुत कम संस्थाएं हैं जो 100 वर्ष से अधिक अवधि से निरंतर चल रही हैं। पंजाब नेशनल बैंक, ट्रिब्यून और DAV कॉलेज, तीन ऐसी संस्थाएं हैं जो देश भर में पूरी गुणवत्ता के साथ आज भी कार्यरत हैं।
मेरा सम्बंद पंजाब नेशनल के 127 वर्ष के इतिहास में बहुत पुराना है। मैंने स्वयं तो बैंक में 1977 से लेकर 2013 तक सेवा की। परन्तु मेरे पिता, चाचा, और दादा श्री भी इसी बैंक में थे। और मेरे भाई और चचेरे भाई भी। इस तरह से गत 100 वर्षों से कालड़ा परिवार की तीन पीडीओं के लिए पंजाब नेशनल बैंक एक कामधेनु की तरह रही है। वैसे पंजाब नेशनल बैंक करोड़ों के लिए कामधेनु है। एक लाख से अधिक तो इस के कर्मचारी हैं। करोड़ों लोग बैंक में आपना धन जमा करवा कर उस पर ब्याज कमाते हैं और करोड़ों बैंक से ऋण लेकर आपने व्यवसाय चलाते हैं। कई हज़ार लोगों के लिए यह कामधेनु इस लिए है क्योंकि उन्हों ने बैंक की शाखाओं या एटीएम के लिए परिसर किराए पर दे रखी है या इस के कई कामों में वकील या चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर सलाहकार हैं। इस तरह से बैंक अर्थ व्यवस्था का बहुत महत्वपूर्ण अंग है।
1947 में जब देश का विभाजन हुआ तो पंजाब नेशनल बैंक की 40% शाखाएं उस भाग में रह गई जो मुस्लिम पाकिस्तान का हिस्सा बन गया। विभाजन से विस्थापित बहुत से लोग पकिस्तान को छोड़ शेष भारत में आन बसे और आपने सब कुछ वहाँ छोड़ आये। उस कठिन समय में बैंक ने आपने ग्राहकों को एक भरोसे का प्रतीक बन कर दिखाया। बैंक के रिकॉर्ड सब पकिस्तान में रह गए थे। मात्र ग्राहक की पास बुक देख देख कर उनको उनके रुपये पैसे का भुगतान कर दिया। विभाजन से विस्थापित ग्राहक पंजाब नेशनल बैंक में बहुत आस्था रखते हैं।
बैंक के 127 वर्ष के इतिहास में बहुत खट्टे मीठे अनुभव हैं। 1960 के दशक में जालंधर के एक कर्मचारी के विरुद्ध बैंक ने कोई कार्यवाही की। उस ने ऐसी अफवाह फैला दी कि बैंक डूबने वाला है। सब लोग आपने रुपया पैसा निकलवाने के लिए आ गए। लम्बी लाइने लग गई देश की सब शाखाओं के बाहर। उस समय की बैंक मैनेजमेंट ने और देश के सरकार ने लोगों का विशवास जीतने के लिए बहुत सूझ समझ से काम लिया और जिस को जितना रूपया पैसा चाहिए था दे दिया। तत्कालीन वित्त मंत्री श्री मोरारजी देसाई के कहने पर भारतीय रिज़र्व बैंक से हेलीकाप्टर द्वारा भी नकदी जगह जगह भेजी गई। तीन दीं तक यह क्रम रात दिन चला। आखिर लोगों को विश्वास हो गया कि बैंक का आधार बहुत ठोस है। लोगों ने रुपये पैसे वापिस जमा कराने शुरू कर दिए और देखते ही देखते बैंक का कारोबार पहले से भी ज़्यादा हो गया। इसी तरह से 2018 और 2019 में बैंक में लगभग 15000 करोड़ के धोखादढि के केस सामने आये। परन्तु गए तीन वर्षों में बैंक ने यह नुक्सान झेल लिया है और अब फिर से बैंक का कारोबार लाभ दे रहा है।
बैंक के 127 वर्ष के इतिहास में बहुत से बैंकों का इस के साथ विलय हुआ है। दो प्रमुख बैंकों का विलय तो 2020 में हुआ है और यह बैंक थे ओरिएण्टल बैंक ऑफ़ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ़ इंडिया। इस से पहले 1993 में नई बैंक ऑफ़ इंडिया और 1986 में हिंदुस्तान कमर्शियल बैंक का विलय हुआ। इस तरह आज की तारीख में यह बैंक देश में स्टेट बैंक के बाद दूसरा सब से बड़ा बैंक है। हम आशा करते हैं कि इस की सेवाओं से इस के ग्राहक हमेशां खुश रहें और इस के कर्मचारी सदा सदाचारी रहें।
सतीश कालड़ा
98866-28853
