Friday, December 10, 2021

पैसा खुदा तो नहीं पर खुदा कसम खुदा से कम भी नहीं।

 पैसा खुदा तो नहीं पर खुदा कसम 

खुदा से कम भी नहीं।


किसी ने खूब कहा है: "पैसा खुदा तो नहीं, पर खुदा कसम खुदा से कम भी नहीं।" क्या अदभुद चीज़ का अविष्कार किया है इंसान ने। कागज़ के टुकड़े पर सब को यकीन हो गया है। रोटी, कपड़ा, मकान, जमीन, जायदाद, सोना, चांदी, हीरे, मोती, जवाहर हम सब इन कागज़ के टुकड़ों के बदले खरीद बेच लेते हैं। और इस से भी बड़ कर विश्वास है हमें आपने बैंक बैलेंस पर। रुपया पैसा तो फिर भी वह कागज़ है जिस के ऊपर रिजर्व बैंक के गवर्नर का आश्वासन हस्ताक्षर सहित दर्ज रहता है। बैंक में रखे पैसे की तो हम कई बार रसीद भी नहीं लेते। पासबुक भी पूरी नहीं करवाते। बस हमें विश्वास है कि बैंक में रखा धन जब हम चाहे मिल जाएगा। बैंक में रखा रुपया पैसा हमें ऐसे लगता है कि जैसे हमारी जेब में ही पड़ा है। जब चाहे जहां से चाहे निकलवा लो: एटीएम से, बैंक से,  डेबिट कार्ड से या QR कोड से। 


गत दो किश्तों में मैने जिक्र किया था कि बैंक दो काम करते हैं: आप बैंक में अपना धन जमा करा सकते हैं और दूसरा वहां से ऋण ले सकते हैं। आज की किश्त में जिक्र करूंगा कि बैंक के द्वारा आप धन का भुगतान कर सकते हैं।


बैंक में आप का धन आप के खाते में सुरक्षित है। फिर बैंक आप के आदेश अनुसार इस का भुगतान करते हैं। आप स्वयं बैंक में जाकर नकदी निकाल सकते हैं या आप आपने खाते से चेक काट कर किसी को दे सकते हैं। आप का चेक बैंक के लिए आदेश है कि वह आप के खाते से पैसा निकाल कर उस को दे दे जिस का नाम चेक के ऊपर अंकित है। चेक भुगतान के कुछ नियम हैं जिस के अनुसार चेक का भुगतान नकदी में भी हो सकता है या उस व्यक्ति या संस्था के खाते में भी जमा हो सकता है जिस के नाम का वह चेक है। इन नियमों के लिए सरकार ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के नाम से कानून भी बनाया है। इस कानून के तहत चेक काट कर देने का मतलब है कि देनेवाला लेनेवाले को आश्वासन देता है कि उसके बैंक खाते में इतना पैसा है जिस से चेक का भुगतान हो जाएगा। इस कानून में यह भी प्रावधान है कि अगर भुगतान ना हुआ तो चेक काटने वाले को सजा भी हो सकती है। 


अगर लेने वाले को देने वाले पर विश्वास ना हो तो बैंक से ड्राफ्ट भी लिया जा सकता है। ड्राफ्ट भी एक तरह का चेक ही है जो कि बैंक के द्वारा जारी किया जाता है। ड्राफ्ट जारी करने से पहले बैंक धनराशि जमा कर लेते हैं।  क्योंकि बैंक भरोसे के प्रतीक माने जाते हैं इस लिए ड्राफ्ट की मंजूरी तुरंत हो जाती है। 


इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और कंप्यूटर मोबाइल के इस युग में भुगतान करने के नए नए विकल्प पैदा हुए हैं। बैंकों ने आपने रिकॉर्ड ना केवल कंप्यूटरीकृत कर लिए हैं बल्कि केंद्रित भी कर लिए हैं जिस के द्वारा आप अपना खाता कहीं से भी ऑपरेट कर सकते हैं। अब चेक द्वारा भुगतान की जगह धन का इलेक्ट्रॉनिक फंड  ट्रांसफर होने लगा है। आप आपने मोबाइल या लैपटॉप का प्रयोग कर इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका मतलब है कि आप आपने लैपटॉप या मोबाइल में ही आपने बैंक के बैलेंस को देख सकते हैं और फिर वहीं से जिस को भुगतान करना है कर सकते हैं। सुरक्षा के लिए बैंक कई विकल्प देता है। इस सुविधा का प्रयोग करने के लिए उचित सुरक्षा निर्देश या नियमो का पालन करते रहना चाहिए। 


बैंक से धनराशि भुगतान के लिए रिजर्व बैंक की देख रेख में एक नई संस्था बनाई गई है जिस का नाम है नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI).  इस संस्था की देखरेख में भुगतान के कई और विकल्प भी सामने आए हैं जैसे कि RTGS, NEFT, IMPS, AEPS, UPI payments, Bill Payments इत्यादि। इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग के जरिए एक साथ अनेक लोगों को पैसे भेजे जा सकते हैं। एनपीसीआई ने Rupay कार्ड का प्रचलन भी शुरू किया है। इस कार्ड से हम एटीएम या पोस टर्मिनल्स से भुगतान कर सकते हैं। Rupay कार्ड आने से पहले डेबिट या क्रेडिट कार्ड के लिए विदेशी कंपनियों के कार्ड ही सुलभ थे: जैसे कि वीजा और मास्टरकार्ड। परंतु एनपीसीआई से देशी कार्ड का प्रचलन काफी बड़ गया है। अब किसानों के लिए किसान कार्ड और लघु उद्यमी लोगो के लिये भी विशेष कार्ड उपलब्ध हैं। 


बैंक अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी हैं। बैंक ना हो तो व्यापार और अर्थव्यवस्था में धन का लेन देन होना संभव ना हो। व्यापार का आधार धन का लेन देन ही तो है। अजीब सी बात है कि बैंकों के इतने विकास के बाद भी कई लोग अभी भी नकदी में लेन देन करते हैं और नकदी को लाने ले जाने में कितना जोखाम लेते हैं। यह काले धन का चलन शायद इसलिए भी है कि एक नंबर में लेन देन करने से कर का भुगतान करना पड़ता है। जमीन जायदाद की खरीद में नकदी का प्रयोग लोग करते हैं क्योंकि कीमत ज्यादा होती है और रजिस्ट्रेशन के चार्जेस 6 से 8% होते हैं।  परंतु नकदी के लेन देन में जोखम तो है ही। रिश्वतखोरी भी नकदी में होती है और भारत में भ्रष्टाचार तो है ही। 


कुछ व्यापारी ऐसे भी हैं जो नकदी का भुगतान एक शहर में लेकर दूसरे शहर में आपने एजेंट के द्वारा करवा देते हैं।  परंतु यह सरकार द्वारा मान्य नहीं है। सरकार के नियमों के अनुसार एक निर्धारित सीमा तक ही नकदी में लेन देन हो सकता है। यह सीमा शायद अभी भी पचास हजार रुपए से कम ही है। कई लोगों ने इस प्रावधान का प्रयोग करके टैक्स बचाने के चोर रास्ते निकाल रखे हैं। छोटे शहरों से खुदरा व्यापारी पचास हजार से कम राशि के 10, 20 ड्राफ्ट बना कर बड़े शहर में माल लेने आता है और इन ड्राफ्ट द्वारा भुगतान कर देता है। ड्राफ्ट छः महीने तक मान्य होते हैं। तो छः महीने तक यह ड्राफ्ट नकद नोटों की तरह ही प्रयोग में लिए जाते हैं। परन्तु यह सब गैर कानूनी है। 


जनता को विदित है कि बैंक सुविधा सुलभ है।  नकदी का गैर कानूनी लेन देन और जोखम भरा कृत्य करने से परहेज करें। टैक्स प्लानिंग के लिए आपने चार्टर्ड अकाउंटेंट से संपर्क रखें। सरकार से भी अनुरोध है कि टैक्स के ऐसे प्रावधान बनाए जाएं जिस से जनता को नकदी का प्रयोग कम से कम करना पड़े। रिश्वतखोरी के ऊपर भी सख्ती करनी चाहिए। बैंकों से भी अनुरोध है कि लेन देन पर खर्चा कम से कम लें ताकि जनता बैंकों द्वारा ही लेन देन करे। 


हाल ही में सरकार ने विशेष बैंक बनाए हैं जिन का काम ही लेन देन करना है (पैमेंट बैंक)। पेटीएम, गूगलपे आदि कई विकल्प सामने आए हैं। अब तो पान खरीद कर भी लोग पेटीएम या गूगलेपे करते हैं। परंतु अजीब सी बात है कि डाक खाने में या सरकारी दफ्तरों में अभी भी नकदी जमा करवानी पड़ती है।  हम उम्मीद करते हैं कि सरकार आपने संस्थानों में भी नकदी का इस्तेमाल कम करके नए विकल्प के लिए मार्ग खोलेगी और हमारी अर्थव्यवस्था जल्द से जल्द कैश लैस तो नहीं हो सकती परंतु न्यूनतम नकदी की तरफ अग्रसर होगी। 


सतीश कालड़ा

बैंगलोर

02.12.2021


Seema Sandesh, Sriganganagar 11.12.2021




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